Hindu Jyotish Mein Karma aur Punarjanmaलेखक: KN Raoप्रकाशक: वाणी पब्लिकेशन यह पुस्तक हिंदू ज्योतिष में कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांतों की गहराई से व्याख्या करती है। KN Rao ने इस...
Muhurat Chintamani by SC Mishra (Suresh Chandra Mishra) Muhurat Chintamani is a comprehensive guide to astrology, specifically focused on the importance of auspicious timings (muhurats) in Hindu rituals and practices....
आयु रहस्य लेखक: वी. पी. गोयल | प्रकाशक: सागर पब्लिकेशंस विवरण:आयु रहस्य में वी. पी. गोयल ने ज्योतिषीय आयु (Life Span) के रहस्यों का अनावरण किया है। इस पुस्तक में,...
दशाफल दर्पण Author- SC Mishra (Suresh Chandra Mishra) जातकतत्व, पत्रिमार्गप्रदीप आदि प्रसिद्ध ग्रंथो के रचयिता श्री महादेव पाठक जी (रतलाम) के सुपुत्र श्री निवास पाठक कृत यह ग्रन्थ लगभग १५०...
Jyotish Mein Anglakshan Author: KN RaoPublisher: Vani Publications Description:Can the signs and marks on your body reveal your destiny? In Jyotish Mein Anglakshan, renowned astrologer KN Rao explores the astrological...
Jaimini Mukta (Pearls From Jaimini) [Hindi] by SC Mishra (Suresh Chandra Mishra) Publisher: Pranav Publications पाराशर द्वारा स्वीकृत लेकिन पाराशर होरा में कुछ कम विस्तार से बताए गए महत्वपृर्ण और सटीक...
कंटक शनि अष्टम शनि शनि की साढ़ेसाती ( अभिशाप या वरदान एक पूर्ण संतुलन )
Author- KN Rao
कंटक शनि अष्टम शनि और शनि की साढ़ेसाती, ये शनि का क्रमश: लग्न और चन्द्र से, चतुर्थ और अष्टम तथा चन्द्र और उससे द्वितीय तथा द्वादश भाव में गोचर मात्र है I लेकिन सतही ज्योतिष करने वाले, शनि एक नाम , एक शब्द जिससे समाज में भय व्याप्त है, को जोड़ कर पैसा कमाते है और जनता को उत्तरोत्तर और विशेषकर संवेदनशील महिलाओ को आतंकिंत करते है I इस सामाजिक कुरीति के विरोध में भारतीय विधा भवन के प्रागण में छात्रों द्वारा सैकड़ो कुण्डिलियों पर इन गोचरों में घटने वाली अनेकानेक घटनाओ पर शोध कार्य किया गया, जिससे निष्कर्ष निकलता है कि शनि का गोचर, मात्र घटना के समय का निर्धारण करने में सहायक सिद्ध हो सकता है लेकिन जीवन कि दिशा दशाओ से ही निर्धारित होती है I किसी भी घटना के शुभ - अशुभ होने में ग्रहो कि विभिन्न भावो व् वर्ग कुण्डलियो तथा राशियों व् नक्षत्रों में परस्पर स्थिति, योग तथा दशाक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है I बारह राशियों, सत्ताईस नक्षत्र, नो ग्रह, बारह भावो व् षोडश वर्गों से ५,५९,८७२ संयोजन बनते है, तो केवल एक गोचर के आधार पर कैसे फलित किया जा सकता है I टेलीविज़न के विभिन्न चैनलो पर तथा समाचार पत्रो में केवल चन्द्र पर शनि के गोचर के आधार पर भविष्य बताया जाता है I छः अरब की विश्व की जनता में , बारह राशियों के आधार पर ५० करोड़ व्यक्तियों का या भारत की १०८ करोड़ की जनता में ९ करोड़ व्यक्तियों का भविष्य एक सा नहीं हो सकता I दैनिक हिन्दू के प्रसिद्ध संपादक कस्तूरी रंजन स्वयं ज्योतिष जानते थे और इस पर विश्वास करते थे और भविष्यवाणी
प्रस्तुत ग्रन्थ में ग्रहों का मानव जीवन पर प्रभाव, ग्रहों के प्रभाव को जानने के साधन, ज्योतिष एवं कर्मवाद, ज्योतिष एवं आयुर्वेद, रोगोत्पति के कारण एवं ज्योतिष शास्त्र में रोग विचार की...
ज्योतिष के आधारभूत सिद्धांत (भारतीय, पाश्चात्य एवं नक्षत्रीय ) ज्योतिष शास्त्र का इतिहास सृष्टि निर्माण के साथ ही आरम्भ हुआ है l गर्ग ऋषि कहते है कि यह विज्ञानं स्वय...
जैमिनी स्थिर दशा से भविष्यवाणी Author- Akhila Kumar मैंने पंजाब के एक ज्योतिषी, जिनका नाम संभवत टेक चंद था, ब्रह्म ज्ञान करने की निम्नांकित विधि समझी थी l पहले ग्रह...
Jyotish ke Mool Sidhant [Hindi]Author: Priyambda Agarwal, KN RaoPublisher: Vani Publications Delve into the foundational principles of Vedic astrology with Jyotish ke Mool Sidhant, a must-read for astrology enthusiasts and...
सुगम वेदिक ज्योतिष [हिंदी]लेखक: जी. एस. अग्रवाल सुगम वेदिक ज्योतिष जी. एस. अग्रवाल द्वारा लिखित एक सरल और व्यावहारिक पुस्तक है, जो वेदिक ज्योतिष के मूलभूत सिद्धांतों और उनके उपयोग...