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Prabhu Ka Darshan Kaise? Tatha Anya Adhyatmic Prashno Ke Uttar
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Prabhu Ka Darshan Kaise? Tatha Anya Adhyatmic Prashno Ke Uttar

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प्रभु का दर्शन कैसे ? तथा अन्य आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर

प्रश्नकर्ता - मै कॉलेज में पढता हूँ, भगवान् को देखना चाहता हूँ l कृपया बताइए कि क्या मै मंदिर जाऊ, ग्रंथो का पाठ कँरू, यज्ञ हवन कँरू, मंत्र जाप कँरू, तीर्थयात्रा कँरू, जंगल जाऊ या गंगा स्नान करू ?

ओशो शैलेन्द्र - नहीं, इन सब से कुछ भी न होगा, दुनिया में करोड़ो - करोड़ो लोग यही कर रहे है लेकिन  उनके  जीवन में परमात्मा क़ी झलक नहीं l अगर गंगा स्नान करने से परमात्मा मिलता होता तो सारी मछलियों को और मेढको को मिल गया होता i गंगा में कितनी मछलियाँ और मेढक है i मछली, मेढक ही नहीं, गंगा में बहुत मगरमच्छ भी है i सबने परमात्मा को पा लिया होता l न ही प्रभु धर्म- शास्त्र पढ़ने से मिलता है i तुम तो केवल पढ़ते हो, दीमक और चूहे तो किताबो को खा ही जाते है i  तुम ऊपर - ऊपर से ही पढ़ते हो, वे तो ग्रंथो के ज्ञान को पचाकर मांस -मज्जा बना लेते है, किन्तु उनको भी प्रभु नहीं मिलता i वन में अरबो पशु -पंक्षी निवास करते है,उन्हे ईश्वर ज्ञान नहीं हुआ l तुम्हे कैसे हो जाएगा l

 

किन्ही किताबो से न मिलेगा, परमात्मा क्या प्रिंटिंग -प्रेस में पैदा होता है? ईश्वर कही चर्चा -मंदिरो में कैद   है क्या ? वह तो परम मुक्त है, वह एक जगह बंद कैसे होगा ? परमात्मा तो सर्वत्र है i लेकिन हमारे लिए ढूंढना सबसे आसान कहा होगा? निकट क़ी जगह में सुगम होगा i और निश्चित ही सबसे ज्यादा निकट हमारे और कौन है ? तो क्यों न हम स्वयं के भीतर ही खोजे i अगर वह सर्वव्यापी है तो हमारे भीतर भी व्याप्त होगा, चलो हम अपने भीतर ही ढूंढते है i

अंतर्यात्रा करनी होगी l अपने भीतर छिपे प्रभु को खोजने का नाम साधना है i ओशोधारा में छह दिवसीय 'ध्यान समाधि शिविर' में परमात्मा से साक्षात्कार होगा ... लेकिन याद रखना कलेंडरों में छापे किन्ही देवी- देवताओ से नहीं, वह जो तुम्हारे भीतर छुपा है, उस दिव्य चैतन्य से l वह आलोकित अनाहत नाद ही भगवान् है l उसे जानने वाला भाग्यवान है l

आत्मा का परम रूप परम- आत्मा है, परमात्मा है l उसका स्वभाव द्रष्टा है l वह सदा साक्षी है अर्थार्त  वह कभी दृश्य नहीं बन सकता l

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