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Jeewan Kranti Ke Sutra
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Jeewan Kranti Ke Sutra

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जीवन क्रांति के सूत्र

प्रस्तुत पुस्तक प्रश्नोत्तर शैली में है l साधको ने अपने अंततर्म में उठने वाले संदेहो को सहज रूप में व्यक्त किया है और ओशो शैलेन्द्र जी ने अपने अनुभवो को पिरोकर उनके संदेहो को शमन किया है l  दोनों सहज स्फूर्त है l  कही कोई बनावट या दिखावट नहीं है ओशो अनुज ओशो शैलेन्द्र जी, परमगुरु ओशो की ही शैली में बोलते है l वे गहरे से गहरे प्रश्नों का उत्तर छोटी -छोटी बोध कथाओ और मुल्ला नसरुद्दीन के चुटकलों में ऐसे समाहित करते है कि श्रोता या पाठक के गले में सहज ही उतर जाते है l

अनुभव तो जीवन में सभी को होते है किन्तु यक्ष का सनातन उत्तर यही है कि अनुभव हारता चला जाता है और आशा जीतती चली जाती है l अनुभव से आदमी कुछ सीखता ही  नहीं l वह नई - नई आशाओ के सहारे जीता है और भौतिक पदार्थो से अपने जीवन को भर लेता है i ओशो शैलेन्द्र जी कहते है कि वो लोग भाग्यशाली है जो बाहर की सफलता जुटाने के बावजूद भीतर के खालीपन को महसूस करते है l  वे कहते है बस यही से क्रांति की शुरुआत होती है l वे अपने प्रवचनों में क्रांति के सूत्र भी देते जाते है i उनका कहना है कि तथाकथित आस्तिक व्यक्ति ही ध्यान के मार्ग पर चले, ऐसा नहीं है l बल्कि तथाकथित नास्तिक या वैज्ञानिक बुद्धि वाला व्यक्ति ज्यादा आसानी से ध्यान में डुब सकता है, क्योकि ध्यान एक विज्ञानं है - आत्मा का विज्ञानं, चेतना का विज्ञानं ए 

अधिकांश व्यक्ति प्रार्थना के माध्यम से भगवान के सामने भीख का कटोरा ही दिखाते रहते है l बल्कि परमात्मा ने जो हमे दिया है उसके प्रति धन्यवाद से भरना ही प्रार्थना है l

आप बड़ी सहजता से कह देते है कि धर्म कोई मजहब या संप्रदाय नहीं बल्कि आनन्दपूर्ण जीवन जीने की कला है l और कलाकार गुरु ही वह कला सिखा सकता है i गुरु कभी बांधता नहीं l जो मुक्त करे वही सद्गुरु है l

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