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Vyavsai Chayan Aur Jyotish - Ek Vistrit Adhyayan
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Vyavsai Chayan Aur Jyotish - Ek Vistrit Adhyayan

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ABOUT THIS BOOK

जन्मपत्रिका रूपी विधाता के पत्र का सन्देश पाकर ही आगे चला जाये तो जीवन-यात्रा के पथ की सही दिशा की ओर पग बढाये जा सकते हैं । जीविका का साधन जीवन-यात्रा के लिए एक वाहन के समान है क्या उचित व्यवसाय उन्नति व सुख-सन्तीष के पथ की मार्गदर्शिका है। जातक को उसकी ग्रहस्थिति तथा नैसर्गिक अभिरुचियों के अनुसार उचित व्यवसाय-वयन में ज्योतिष पूर्ण रूप से सहायता कर सकती हैं । जिससे सही दिशा की और जाने से श्रम तथा समय वृथा नष्ट न हों व प्रारंभ से ही समयतथा ऊर्जा का फ्तदायी उपयोग हो सके। नियति ने जातक को किस व्यवसाय के लिए योग्यता प्रदान की है यह जन्मपत्रिका के माध्यम से जानकर उचित दिशा में प्रयास किया जाये तो उन्नति तया सन्तोष के मार्ग अधिक प्रशस्त होंगे ।ऐसे ही विचारों से प्रेरित होकर मैंने प्रस्तुत पुस्तक में विभिन्न व्यवसाय वाले व्यक्तियों की पत्रिकाओं के उदाहरण देते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि किस ग्रह-स्थिति के फलस्वरूप कौन -से व्यवसाय आप चुनना चाहते हैं, उसका कारक ग्रह कौन-सा है तथा आपकी ज़न्मपत्रिका में वह शुभ फलदायी स्थिति में है अथवा नहीं । जातक की ग्रह-स्थिति के अनुसार उसे कौन –सा व्यवसाय अधिक अनुकूल रहेगा। पुस्तक में विशेष रूप से दशम भाव तथा सम्बद्ध भावों का अध्ययन किया गया है । फलकथन की मूलभूत जानकारी के रूप से द्वादश भावों, ग्रहों, राशियों तया उनके गुण, स्वभाव की विवेचना की गई है। पत्रिका के अध्ययन में लग्न कुण्डली को ही प्राथमिक्ता दो गयी है । पश्चात विभिन्न व्यवसायरत जनों की पत्रिकाओं के माध्यम से उनके उस कार्य विशेष की और जाने के कारणों का विश्लेषण किया गया है । इसमें कुछ लोग इंजीनियर, आई.ए.एस., कलाकार या होटल मालिक क्यों नहीं बन सके, उन कारणों का भी विश्लेषण किया क्या हैं।

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