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Sampuran Chanakya Neeti
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Sampuran Chanakya Neeti [Hindi]

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सम्पूर्ण चाणक्य निति

. मुर्ख व्यक्ति वस्तुत: दो पैरो वाला पशु ही होता है l कारण कि वह अपने आचार -व्यवहार, वाणी द्वारा अन्य लोगो को वैसे ही पीड़ा पहुँचता रहता है जैसे शरीर में चुभा हुआ कांटा पीड़ा पहुँचता है l

. बुरे शब्द बोलने वाली और दुष्ट नारी, पापी स्वभाव वाला मित्र मालिक के सामने हर बात का उत्तर देने वाला नौकर और सांपो वाले घर में रहना l यह सब बाते मौत का ही स्वरूप है l इसमें कोई संदेह अथवा दो राय नहीं l

. धन संचय करके बुरे समय के प्रति निश्चित नहीं हो जाना चाहिए, क्योकि धन बुरे समय में रक्षा नहीं कर सकता - धन तो पता नहीं कब चला जाए l बुरे समय के लिए सूझबूझ पर ज्यादा ध्यान रखना चाहिए l

. जो श्रेष्ठ मित्र नहीं है उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए l क्योकि ऐसा मित्र यदि रुष्ट हो गया तो न मालुम कब वह सारा रहस्य उजागर कर दे l

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