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Sachitra Jyotish Shiksha (Ganit Khand, Second): (Part 1) [Hindi]

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DESCRIPTION

Sachitra Jyotish Shiksha (Ganit Khand, Second): Part - I [Hindi] by 

Babulal Thakur Jyotishacharya

Publisher: Motilal Banarsidass Publication Books (MLBD)

ज्योतिष के अधिकतर ग्रन्थ संस्कृत में ही हैं। किन्तु संस्कृत से अनभिज्ञ व्यक्तियों के लिए इस माध्यम से विषय का अध्ययन कठिन है। इसलिए हिन्दी में एक ऐसी पुस्तक की आवश्यकता थी जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति ज्योतिष का सरलता से अध्ययन कर सके।

इस प्रयोजन को ध्यान में रखकर ही प्रस्तुत पुस्तक सात खण्डों में प्रकाशित की गई है। ये सात खण्ड प्रारम्भिक ज्ञान, गणित, फलित, वर्ष-फल, प्रश्न, मुहूर्त तथा संहिता खण्ड है।

  1. प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड : इस खण्ड के अध्ययन से ज्योतिष-सम्बन्धी बहुत-सी बातें समझ में आ जाती हैं, जैसे किसी का जन्म, सम्वत्, मास, पक्ष, दिन, समय आदि ज्ञात न हो तो केवल कुण्डली- चक्र देखकर सभी बातें बताई जा सकती हैं। बिना पंचांग के तिथि, नक्षत्र, करण, वार, सूर्य, चन्द्र आदि स्पष्ट बताए जा सकते हैं। केवल इसी भाग के अध्ययन से संक्षिप्त जन्म-पत्रिका बनाई जा सकती है। अन्त में फलित-सम्बन्धी मुख्य-मुख्य बातें संक्षेप में बताई गई हैं।
  2. गणित खण्ड : इसके दो भाग हैं। इसमें पूरी जन्मपत्री बनाने की विधि है। प्रत्येक गणित करने की सोदाहरण नीति देकर पूरी गणित-प्रक्रिया दी गई है।
  3. फलित खण्ड : प्रथम भाग- इसमें फलित-सम्बन्धी बातें दी गई हैं और महापुरुषों को कुण्डलियों से उदाहरण देकर समझाया गया है।

द्वितीय भाग- इसमें ग्रहों की दृष्टि, योग, वर्ग, स्थान आदि के आवश्यक विषयों पर सूक्ष्म विवेचन किया गया है।

तृतीय भाग- इसमें विस्तृत शा-विचार के साथ भाग्य, धर्म, कीर्ति, विद्या, बुद्धि, सुख-दुःख आदि विषयों पर विचार प्रकट किया गया है, माता-पिता, भाई-बंधु आदि सम्बन्धों पर ग्रह-प्रभाव का ज्ञान प्राप्त करने के लिए इस ग्रन्थ की उपादेयता अनुपम है।

  1. वर्ष-फल खण्ड : इस वर्ष फल बनाने का पूरे गणित उदाहरण देकर समझाया गया है।
  2. प्रश्न-खण्ड : इसमें प्रश्मा ज्योति सम्बन्धी बातें दी गई हैं और किसी प्रश्न का उत्तर देने अभ्यास उदाहरण देकर समझाया गया है।
  3. मुहूर्त-खण्ड : इसमें मुहूर्त-सम्बन्धी सम्पूर्ण जानकारी उपलव्य है। शुभाशम मुहूर्तों का विवरण दिया गया है।
  4. संहिता-खण्ड : इसमें राष्ट्रीय ज्योतिष-सम्बन्धी विषयों पर विस्तार से विचार किया गया है। अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियों के अनुसार देश या नगर की राशि स्थिर करने के प्रकार बताए गए हैं। किसी भी देश के भविष्य की जानकारी के लिए ज्योतिर्विद् इस खण्ड का सफल उपयोग कर सकते हैं। भविष्यवाणी में प्राच्य और पाश्चात्य दोनों रीतियों का सुविशद व सारगर्भित वर्णन है।

 

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