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Ratna Prashnottari
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Ratna Prashnottari [Hindi]

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रत्न प्रश्नोत्तरी

आदिम युग से ही प्रकृति में प्राप्त होने वाले रंग -बिरंगे, विभिन्न आकार, स्वरुप वाले कंकर - पत्थरों के प्रति मनुष्य की जिज्ञासा बनी रही है I आरम्भ में ये मात्र अलकरण के साधन थे I

रत्न शायद जाति, धर्म,  देश, काल के परे है I एक तरह से वे मानव मन की मूलभुत एकता के भी प्रतिक है I रत्नों को सभी धर्मो के, सभी विश्वासों के लोग वेहद आस्था, विशवास के साथ धारण करते है I

रत्न धारण करने से ग्रह विशेष के अशुभ प्रभाओ को दूर करता है I रत्नों का अब चिकित्सा के लिए भी उपयोग किया जाने लगा है I 'जेम थेरेपी' नाम से एक नई चिकित्सा - पद्धति का प्रचार हो रहा है I भारत में आर्युवेद में भी रत्नों को रोगनाशक बताया गया है I महर्षि चरक ने चरक संहिता में दैवी चिकित्सा का स्वरुप बतलाया है I  वे लिखते है - मन्त्र, ओषधि धारण, मणि धारण, मंगल कार्य, हवन, प्रायश्चित, उपवास, अपने से पूज्यो के प्रति आदर, श्रदाभाव, तीथार्टन आदि दैवी चिकित्सा के आवश्यक अंग है I यह भी मत प्राप्त होता है कि यदि रोग -निवारण में ओषधि फलदायक न हो तो मणि एवं रत्न चिकित्सा का आश्रय लेना चाहिए I

 

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