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Prshanmarg (Vol 1 & 2) - Hindi
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Prshanmarg (Vol 1 & 2) - Hindi

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ग्रन्थ की विषयवस्तु - इस ग्रन्थ का नाम प्रश्न मार्ग है l अस्तु, यह ग्रन्थ देवज्ञ को जीवन से सम्बन्धित सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के समाधान का मार्ग प्रशस्त करता है l यह समाधान जातकशास्त्र, प्रश्नशास्त्र,मुहुर्तशास्त्र, स्वरोदयविज्ञान, आयुर्वेद, प्राकृतिक लक्षण, सहिंताज्योतिष, शकुनशास्त्र, स्वप्नशास्त्र, व्यक्ति की भाव - भंगिमाएँ, उसकी चेष्टाएँ तथा उसके मनोविज्ञान पर आधारित होता है  l अस्तु:, ३२ अध्यायों तथा छब्बीस सौ के लगभग श्लोको में विस्तारित इस ग्रन्थ में ज्योतिष ही नहीं, आयुर्वेद से समबन्धित अनेक विषयों का भी वर्णन है  l यह सिद्ध होता है की ग्रंथकर्ता बहुमुखी प्रतिभा के धनी है l यही कारण है की ग्रन्थ में अनेक दूसरे ग्रन्थों से अति महत्वपूर्ण उदाहरण दिये गये है l उनमे से एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ 'माधवीयम' है, जिसके लेखक आचार्य माधव थे, जो कि विजयनगर साम्राज्य कि अधिपति ' बुक्कदेव' की सभा में रहते थे l सम्भवत: यह वेदो के भाष्यकार सायण के भाई थे l

 ग्रन्थ की हिंदी टिका को 'पाथेय' नाम दिया गया है, जो की निशिचत रूप से हिंदी भाषी क्षेत्र के पाठको के लिए प्रश्नरूपी मार्ग में 'पाथेय'  का काम देगी पाठक इसे 'पाथेय' भी कह सकते है टिका को सरल ग्रन्थ की हिंदी टिका को 'पाथेय' नाम दिया गया है, जो की निशिचत रूप से हिंदी भाषी क्षेत्र के पाठको के लिए प्रश्नरूपी मार्ग में 'पाथेय'  का काम देगी पाठक इसे 'पाथेय' भी कह सकते है टिका को सरल भाष्य का रूप दिया गया है l जिसमे की पाठक को विषय को भली- भाति समझने में कोई कठिनाई ना हो यथास्थान आवष्यकतानुसार स्प्ष्टीकरण हेतु चक्र तथा सारणिया भी दी गयी है l टिका की भाषा को सरल एवं बोधगम्य रखने का प्रयास किया गया है l 

 

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