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Preeti Hai Rah Mukti Ki
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Preeti Hai Rah Mukti Ki [Hindi]

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प्रीति है राह मुक्ति की

जीवन को प्रेम व् सम्मान करने वाले, आनंद- उत्सव में जीने वाले अदभुत बाउल फकीरो द्वारा गाए प्यारे गीतों में साधना के गहन सूत्र छिपे है I जिस खजाने की ये चाबियां है, वह सम्पदा हम सबके भीतर विधमान है I

ह्रदय की सहज स्फुरणा से जन्मे गीत, साहितियक कविताए नहीं है I बाउल तो बावरे, अर्थार्त दीवाने होते है I परमात्मा की मंदिरा पिने वाले भाव - विभोर मस्ताने होते है I अपने प्रियतम का जिक्र करने वाले को शब्दों और मात्राओ की कहां फिक्र !

अध्यात्म को समझने में बुद्धि काम नहीं आती I इन गीतों के भावो को ह्रदयगम करना I सिर्फ दिमाग से नहीं, दिल से भी समझा जाता है I समझने का यही भावनात्मक तरीका ही संतो की, बुधो की, फकीरो की, जीनो की, भक्तो की पारलौकिक वाणी से जोड़ निर्मिर्त कर पाता है I

इन गीतों में बाउलों की आंतरिक अनुभूतिया प्रगट हुई है I यधपि दिव्य अनुभूतिया तो सभी को सामान होती है, किन्तु अभिव्यकितयों बड़ी भिन्न - भिन्न शैलियों में होती है I इन अनूठे नाचते -गाते -बजाते संतो का अंदाज भी बेजोड़ और निराला है I शायद पृथ्वी के अन्य किसी कोने में परमात्मा इस भांति प्रगट नहीं हुआ, जैसा बंगाल की धरती पर हुआ -ज्ञान + भक्ति + कर्म  की उत्सवमयी त्रिवेणी बनकर अवतरित हुआ I 

ध्यान यानी निर्विचार जागृति को साधने से शांति घटित होती है I शांतिपूर्ण ह्रदय में अलौकिक प्रीति उमगती है I प्रीति शुद्धतर होते - होते श्रद्धा, शिष्यत्व, समर्पण - भावना और अंतत : भक्ति में रूपांतरित हो जाती है I  पराभक्ति से मुक्ति फलित होती है I संक्षेप में बस यही है धर्म का मार्ग, यही है परम् युक्ति -- 

जागृति - शांति - प्रीति - भक्ति - मुक्ति I

 

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