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Notebandi 50 Din - Hindi
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Notebandi 50 Din - Hindi

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गरीबी में जन्मे , पले और बड़े हुए नरेंद्र मोदी और अमीरी में जन्मी देश के पहले यशश्वी प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की उत्तराधिकारी - पुत्री इंद्रा गाँधी के राजनैतिक कैरियर में समानता है l इंदिरा जी ने " गूंगी गुड़िया " की छवि से मुक्त होकर अपना स्वतंत्र जनाधार बनाने के लिए गरीबों की दुहाई देते हुए सन १९६९ में बैंकों का राष्ट्रीय करण किया था l इंदिरा जी गरीबों की मसीहा बन गई , हालांकि गरीबी नहीं हटी l

सन २०१४ में नरेंद्र मोदी ३० साल बाद स्पष्ट बहुमत वाली सरकार के मुखिया बने l इंदिरा जी द्वारा बैंकों का राष्ट्रीयकरण देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी आर्थिक क्रांति थी , जिसका मकसद था ' गरीबी हटाओ' l सन २०१६ में इसी मंशा से नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सबसे बड़े करेंसी रिप्लेसमेंट की जोखिम उठाई l बैंकों के राष्ट्रीयकरण से देश की ५५ करोड़ आबादी (तब ) प्रत्यक्ष प्रभावित नहीं हुई थी , पर २३ अरब नोटों को रिप्लेस करने के नरेंद्र मोदी के जोखिम भरे फैसले ने सारे देश को क्यू में खड़ा कर दिया l नोट बंदी के ५० दिनों में देश के १२५ करोड़ लोगो ने नकदी का ऐसा भीषण संकट सहा कि लूट मच जाए, दंगे हो जाएं, और सत्ता पलट जाए l नरेंद्र मोदी पर लोगों का भरोसा ही है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ l कालेधन और जालीनोट को ख़तम करने के लिए शुरू हुई नोट बंदी का समापन कैशलेस इकॉनमी से होने जा रहा है, जो फिर एक बड़ी चुनौती है l नरेंद्र मोदी को भरोसा है कि यह सम्पूर्ण अभियान देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कर देगा l

नरेंद्र मोदी का कहना है - 'देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने वाले काले धन को खत्म करने की लिए बहुत साल पहले नोटबंदी हो जाना थी , पर यह जोखिमभरा कदम था l मैंने यह कदम उठाया , क्योंकि मेरे लिए दल से बड़ा है देश l सत्ता से बड़ी है देश की जनता l मेरा स्वप्न है - ऐसा भारत जहाँ का किसान खुश हो , व्यापारी संपन्न हों , महिला सशक्त हो, युवा रोज़गाररत हों , जहाँ हर परिवार का बुनियादी सुविधाओं वाला अपना घर हो"

नोटबंदी पर देश की यह पहली पुस्तक विगत ५० दिनों का रोज़नामचा होने के साथ नरेंद्र मोदी के स्वप्न - 'विकसित और संपन्न भारत ' की सम्भावना की तलाश है....!

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