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Nav Grah Purana
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Nav Grah Purana

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नवग्रह पुराण

नवग्रह पुराण इतिहास एक मनोमुग्धकारी वर्णन है जिसमे नवग्रहों के जन्म, जीवन, तथा महिमा का विस्तार से, रोचक आख्यान दिया गया है l ये वे सशक्त देवता गण है जो नक्षत्रीय देव है एवं जो मानव नियति के चरम भाग्य नियन्ता है l 

यह सम्मोहक आख्यान नवग्रहों की आनंददायी, आत्मीय तथा रोचक एवं निजी कथाएँ प्रस्तुत करता है, यथा, सूर्य अपनी प्रचंड उष्णता, तेज़ एवं ताप को अपनी प्रिया संज्ञा को सुख देने के लिए कम एवं नियमित कर देता है l चंद्र अपनी गुरु पत्नी के लिए कामुक हो, अभिशप्त हो, क्षयी होने, निर्बलता पाने लगता है l कुज -मंगल- का उदभव तापत्रय विहीनता के लिए होता है, जो भू -सम्पदा भी दिलाएगा l क्रोधान्ध शिव के निगलने से शुक्र बनते है l शनिश्चर त्रिमूर्ति से निवेदन करते है कि वे सभी जीवित प्राणियों के मन में डर पैदा करेंगे l सूर्य और चंद्र को निगलकर राहु और केतु अपना प्रतिशोध उनसे लेंगे l यह तो अत्यन्त सम्मोहक नाटक, रोमांस, हास्य तथा भक्ति, श्रद्धा धर्मानुराग, उपासना, निष्ठां,अनुरिक्त एवं समर्पण का कथा -सरित सागर है जो बतलाता है कि कोई भी जीव इन कठोर नवग्रहों के प्रभाव से बच नहीं सकता l 

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