Call Us: +91 99581 38227

From 10:00 AM to 7:00 PM (Monday - Saturday)

Mayavi Brihad Indrajaal
Sold Out
  • SKU: KAB0037

Mayavi Brihad Indrajaal

Rs. 500.00
Shipping calculated at checkout.
ABOUT THIS BOOK

इन्द्रजाल का नाम सुनते ही सभी को लगता है कि यह कोई मायावी विद्या है। बहुत से लोग इसे तंत्र, मंत्र और यंत्र से जोड़कर देखते हैं। कई लोग तो इसे काला जादू, वशीकरण, सम्मोहन, मारण और मोहन से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि फारसी में इसे तिलिस्म कहा जाता है। कुछ लोग इसे काला जादू भी मानते हैं। यह शब्द इन्द्रजाल भारत में बहुत प्रचलित है जो जादू के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है।

प्राचीनकाल में इस विद्या के कारण भी भारत को विश्व में पहचाना जाता था। देश-विदेश से लोग यह विद्या सिखने आते थे। आज पश्‍चिम देशों में तरह-तरह की जादू-विद्या लोकप्रिय है तो इसका कारण है भारत का ज्ञान। इन्द्रजाल जैसी विद्या चकमा देने की विद्या है। आजकल भी भाषा में इसे भ्रमजाल कह सकते हैं। जादू का खेल ही इन्द्रजाल कहलाता है। मदारी भी बहुधा ऐसा ही काम दिखाता है। सर्कस के भ्रमपूर्ण कर्तबन करने वाले, बाजीगर, सड़क पर जादू दिखाने वाले आदि सभी लोग ऐंद्रजालिक हैं। हालांकि मध्यकाल में इस विद्या का बहुत दुरुपयोग हुआ। युद्ध में विजय, धर्म के विस्तार और व्यक्तिगत स्वार्थ साधने में कई लोगों ने इसका उपयोग किया। आज भी इस विद्या द्वारा लोगों को भरमाया जाता है। खासकर पश्चिमी धर्म के लोग इसका खूब इस्तेमाल करते हैं। 

माना जाता है कि गुरु दत्तात्रे भी इन्द्रजाल के जनक थे। चाणक्‍य ने अपने अर्थशास्‍त्र में एक बड़ा भाग विद्या पर लिखा है। सोमेश्‍वर के मानसोल्‍लास में भी इन्द्रजाल का उल्लेख मिलता है। उड़ीसा के राजा प्रताप रुद्रदेव ने 'कौतुक चिंतामणि' नाम से एक ग्रंथ लिखा है जिसमें इसी तरह की विद्याओं के बारे में उल्लेख मिलता है। बाजार में कौतुक रत्‍नभांडागार, आसाम और बंगाल का जादू, मिस्र का जादू, यूनान का जादू नाम से कई किताबें मिल जाएगी, लेकिन सभी किताबें इन्द्रजाल से ही प्रेरित हैं।
REVIEWS

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED PRODUCTS

BACK TO TOP