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Master Kheladilal Sankata Parsad

Laghu Parashari [Hindi]

Laghu Parashari [Hindi]

Regular price ₹ 75.00
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Item Code: KAB2070

'बृहत' और “लघु' पराशरी नामक ग्रन्थ देखकर किसी गणक ने 'मध्यपाराशरी' नाम से एक ग्रन्थ लिखा। जिसमें न जाने सम्पादक या लेखक आदि के प्रमाद से बहुत जगह अशुद्ध, अयुक्त तथा पुनरुक्त पाठ दृष्टिगोचर हुए 'जो प्रकाशित ग्रन्थ मूल या भाषाटीका रूप में मिलते हैं। उनमें भी मूल का संशोधन करना तो दूर रहा, मूलस्थित शुद्ध शब्द का भी अशुद्ध और असंगत  अर्थ टीकाकारों ने लिखा है जो अबोध विद्यार्थियों के लिए लाभ के स्थान में हानिकारक हो सकता है। जेसे--मृगाधिप का अर्थ मकर, गुरु भाव का अर्थ वृहस्पति; मानभाव का अर्थ नवम भाव, वृष राशि में बेठकर तुला के नवांश में हो इत्यादि असंगत अर्थ है (क्योंकि वृषराशि में तुला या वृश्चिक का नवांश होता ही नहीं) ऐसा अनर्थ देखकर विद्यार्थियों से प्रार्थित होने पर मैंने  प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकों के आधार मूल ग्रन्थ कीं अशुद्धियों का संशोधन करके यथामति सोदाहरण भाषा टीका लिंखंकर काशी के  सुग्रसिद्ध प्रकाशक मास्टर खेलाड़ीलाल के पुत्र स्व. श्रीयुत्‌ बाबू जगन्नाथ प्रसाद जी यादव को प्रकाशनार्थ समर्पण कर दिया। जिन्होंने अपने द्रव्य से विद्यार्थियों के उपकारार्थ यत्नपूर्वक लघुंपाराशरी के इस संस्करण में उसके साथ ही इसे भी प्रकाशित किया है। यदि 'इससे जनता का कुछ भी लाभ हुआ तो हम अपने परिश्रम को सफल समझेंगे।

'संहृदय सुजनः समाज से सादर निवेदन है कि इसमें मनुष्यदोषवश या यन्त्रादि द्वारा जो कुछ अशुद्धि रह गई हो उसे सूचित करें तो हम अग्रिम संस्करण में संशोधन कर उनके चिर कृतज्ञ बनेगें 

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