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Jatak Saravali Navam Bhav
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Jatak Saravali Navam Bhav [Hindi]

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जातक सारावली- नवम भाव आकाशीय पिण्डों के अध्ययन एवं ज्योतिष शास्त्र के शोध सिद्धांतों से आलोकित व्यवसाय पक्ष का प्रज्वलित प्रकाश पुंज है। व्यवसाय और कर्म के अधिष्ठाता महाप्रभु की परमपावन पुनीत प्रदरज का मंगल तिलक है

जातक सारावली- नवम भाव। व्यवसाय अर्थात्‌ जीविकोपार्जन का माध्यम, समस्त मानव जाति की गति, मति, प्रगति, उन्‍नति की सम्यक्‌ स्थिति का अभिन्‍न अभिनव अंग है। व्यवसाय का गौरव ही नर-नारियों की प्रभुता व सत्ता, अधिकार व कर्तव्य, कर्म व दायित्व की त्रिवेणी है और यही जीवन की विविध व्यवस्थाओं और व्यवसायों से अलकृत कर्म का ऐसा सिंधु है, जिसमें अनवरत अनंत, अविरल, निर्मल, कोमल मधु एवं इग्घ धाराओं का समायोजन एवं निरंतर प्रवाह होता रहता है। मनोनुकूल व्यवसाय प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होती है | व्यवसाय पक्ष पर केंद्रित अनेक ग्रंथ उपलब्ध हैं परंतु अधिकांश ग्रंथों की प्रामाणिकता संदिग्ध है | 

किसी कुशल ज्योतिर्विद से पूछे जाने वाली प्रमुख जिज्ञासाओं में जातक /जातिका के व्यवसाय से सम्बन्धित प्रश्न को रेखांकित किया जा सकता है | वह नौकरी करेगा या व्यापार में सफलता प्राप्त करेगा, उद्योगपति बनेगा या परामर्शदाता बनकर धनार्जन करेगा | यदि उद्योगपति बनेगा तो किस स्तर का होगा, क्या देश के प्रतिष्ठित और यशस्वी उद्योगपतियों में उसके नाम की गणना होगी या फिर कोई साधारण नौकरी करके मात्र जीवनयापन कर सकेगा | ऐसे कई प्रश्न अभिभावकगण प्राय: पूछते रहते हैं और यह स्वाभाविक होने के साथ ही अनिवार्य भी है | जातक सारावली-नवम भाव का वैशिष्ट्य है, नवांश चक्र द्वारा उपयुक्‍त व्यवसाय को रेखांकित करना | नवांश चक्र के अध्ययन के अभाव में किसी भी जातक के व्यवसाय का सटीक अनुमान करना लगभग उसी प्रकार है, जैसे किसी व्यक्ति का चित्र देखकर सम्बन्धित व्याधियों का रेखांकन करना। अस्तु, नवांश चक्र का तलस्पर्शी मर्म तथा ऐसे अनेक विषयों के प्रामाणिक व परीक्षित शोधसूत्र, इस कृति  में समाहित हैं जो इसे व्यवसाय पक्ष पर केन्द्रित एक असाधारण कृति के रूप में परिलक्षित करते हैं | 

कृति को विषय के विस्तृत धरातल के आधार पर 19 शोधपरक एवं ज्ञानवर्द्धक अध्यायों में व्याख्यायित किया गया है| इस कृति के अंतर्गत श्रीमती मृदुला त्रिवेदी एवं श्री टी.पी. त्रिवेदी ने अपने पूर्व 40 वर्षों के अध्ययन, अनुभव, अनुसंधान के पावन प्रांजल पीयूष का संचरण किया है। समस्त जिज्ञासु पाठकों एवं ज्योतिष प्रेमियों के लिए जातक सारावली-दशम भाव पठनीय, अनुकरणीय व संग्रहणीय है जिसमें सब हित - सिद्धान्तों के क्रियान्वयन से व्यवसाय पक्ष से संदर्भित भविष्य कथन करने का अपूर्व कौशल और सामर्थ्य प्राप्त होना संभव है | 

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