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Graha Gochar Ki Sarthak Abhivyakti - Hindi
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Graha Gochar Ki Sarthak Abhivyakti - Hindi

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ग्रह  गोचर  की  सार्थक  अभिव्यक्ति  - हिंदी

जन्म कुंडली में लग्न और अन्य भाव, ग्रहों कि स्थिति, उनकी दृष्टियां व सम्बन्ध, योग एवं अरिष्ट एक अनुभवी ज्योतिषी  के समक्ष जातक के व्यक्तित्व और ुाके जीवन में होने वाली मुख्य घटनाओं को उद्घाटित कर देते हैं l ये अच्छी और बुरी घटनाएं सम्बंधित ग्रहों कि दशा / अंतर्दशा में साकार होती हैं l दशा अंतर्दशा के इन परिणामों कि तीव्रता को बढ़ाने और घटाने में उस समय की गृह स्थिति का भी महत्वपूर्ण योग रहता है , जिसे गोचर कहा जाता है l इसलिए गोचर को कर्म फल प्रकाशक दैवी शस्त्र कहना अनुचित न होगा l गृह गोचर की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए ही प्रमुख गोचर नियमों को इस पुस्तक में संकलित किया गया है l गोचर में जन्म - चन्द्र को मुख्य धुरी माना गया है l चन्द्र मन एवं भावनाओं का प्रतीक है l गोचर के ग्रहों को चन्द्र राशि के देखने पर ही शुभ और अशुभ परिणामों का सही ज्ञान हो पाता है l पुस्तक में सूर्य और लगन के सम्बन्ध में भी गोचर ग्रहों का विश्लेषण किया गया है l " गोचर और अष्टकवर्ग " का एक नया अध्याय भी जोड़ा गया है l

पुस्तक में दिए गए नियमों की बृहद पराशर होरा शास्त्र, बृहत् जातक , सारावली आदि शास्त्रीय ग्रंथो के सूक्ष्म विश्लेषण के पश्चात कलमबद्ध किया गया है l फलदीपिका, काल प्रकाशिका, जातक भरनम और यवनजतक में विस्तारपूर्वक गोचर तकनीक दी गई है l इन शाश्त्रो के अध्ययन से पुस्तक को उचित मार्गदर्शन मिले हैं l

 

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