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Dhyan Se Nirvan Ki Aur
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Dhyan Se Nirvan Ki Aur

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ध्यान से निर्वाण की ओर 

अंतर्यात्रा ध्यान से शुरू होती है I लेकिन इसकी मंजिल निर्वाण है और मध्य से समाधि है I सच कहो तो एक साधक के पास अंतर्यात्रा का पूरा मानचित्र होना चाहिए I 

मैंने इसको खूब महसूस किया है I जैसे एक यात्री कही जाता है तो उसकी पास पूरा मानचित्र होता है I ओशोधारा में अंतर्यात्रा का पूरा मानचित्र देना चाहते है I एक साधक कहा से शुरू करे ? कौन- कौन से मील के पत्थर आते है और फिर कहां जाना है उसको ? 

संक्षिप्त में कहना चाहुगा कि द्रष्टा की मंजिल ध्यान है I ध्यान की मंजिल साक्षीत्व है, साक्षीत्व की मंजिल तथाता है I तथाता की मंजिल सुमिरन है I सुमिरन की मंजिल समाधि है I समाधि की मंजिल निर्वाण है I द्रष्टा अंतर्यात्रा का आरंभ है I मध्य में ध्यान, साक्षी, तथाता, सुमिरन और समाधि है I निर्वाण उसकी मंजिल है I

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