Anand - Geeta [Hindi] by Osho Siddhartha Publisher: Oshodhara
आनंद गीता
'आनंद गीता ' सद्गुरु ओशो सिद्धार्थ जी की साधना डायरी है, जो १९९५ से २००५ के बिच लिखी गई i पहले यह तीन भागो में प्रकाशित की गई थी - 'बुद्धम शरणम् गच्छामि' 'संघ शरणम् गच्छामि ' एवं धम्म शरणम् गच्छामि' i बाद में पदों का विषयानुसार संकलित कर 'आनंद गीता' पुस्तक प्रकाशित किया गया i
इसके विषय में स्वयं सद्गुरु कहते है -' जीवन जीने की कला पर अकबर के सेनापति रहीम खानखाना ने बड़ी ऊचाई के दोहे लिखे थे I तब से चार सौ वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई भी कवि या संत इस विषय पर कुछ और लिखने का साहस नहीं जुटा पाया, जबकि इन चार सौ वर्षो में जीवन शैली में बहुत रूपांतरण घटित हुआ है i सबसे बड़ा परिवर्तन तो यह हुआ कि युगपुरुष ओशो ने जीवन के धर्म का आधार बना दिया i इसलिए 'आनंद गीता ' धर्म, सत्य , हुकुम, ताओ, परम् नियम, अस्तित्व, आत्मा, अनात्मा अथवा परमात्मा के आकाश में अद्वैत, कैवल्य और निर्वाण की उड़ान है i इस उड़ान में वे सभी आमंत्रित है,जिनके पास प्रज्ञा की पूंजी है, श्रद्धा का टिकट है और आँसुओ की थैली है i जाती या संप्रदाय, देश या प्रजाति, गृहस्थ या सन्यस्त, स्त्री या पुरुष - कोई शर्त नहीं I नैतिकता - अनैतिकता का कोई सवाल नहीं I यह यात्रा बड़ी रोमांचकारी है I इन पदों को जो भी अपने जीवन की किताब में लिखेगा, ह्रदय से गुनगुनाएगा, एक दिन वह भी परम् विश्राम को उपलब्ध हो जाएगा I
आनंद गीता का एक- एक पद अपने आप में अद्वितीय एवं अनूठा है I इसके एक- एक पद में वेद, वाइबिल , कुरान , जिनसूत्र, गीता , महागीता और अवधूत गीता छिपी हुई है I बस आवश्यकता है तो केवल उसे जीने की, उसे पीने की, उसमे डूबने की, उसमे उतरने की, उसमे समाहित होने की, अथवा उसे अपने ऊपर आच्छादित हो जाने देने की I