ग्रन्थ-परिच्चय
आयु के विषय में हमारे तपस्वी ऋषियों ने अपनी उत्पाद्य प्रतिभा से अनेक पद्धतियों का विकास किया है। प्रस्तुत ग्रंथ में बादरायण, गर्ग, यवन, पराशर आदि महर्षियों एवं वराह, श्रीपति,
सत्याचार्य, मणित्थ, श्रीधर आदि आचार्यों के बचनों का आधार एवं अपने अनुभव को लेकर विद्वान ग्रंथकार आचार्य मुकुन्द दैवज्ञ ने स्वरचित 755 श्लोकों में वेज्ञानिक, मौलिक और व्यावहारिक विवेचन किया है।
विषय को विशेष ऊहापोह के साथ हिन्दी भाषा के विस्तृत भाष्य में डॉ. सुरेशचन्द्र मिश्र ने पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत किया गया है।
इस ग्रन्थ रत्न में आप पायेंगे-
- पराशर, जैमिनी आदि के सम्प्रदायानुसार आयु : की विभिन्न पद्धतियों का विवेचन व परीक्षण।
- आयुर्निर्णय कौ समस्त पद्धतियों का एकत्र समाकलन
- आयु कितनी? इसका निश्चयात्क विवेक।
_- मारकंश का विस्तृत विचार
_- अकाल मृत्यु, अपमृत्यु या दुर्घटनाएं आदि।
_- गणित द्वारा आयु की सूक्ष्मतम अबधि का परिज्ञान।
- अरएिप्ट का प्रामाणिक एवं तक॑सम्मत निर्णय।
- जीवन में तया उत्साह एवं ज्योतिष शाघ्त्र कौ चमत्कारिक वैज्ञानिकता का दिदर्शव।
-: आकष्मिकताएँ - ज्योतिष के झरोखे से उदाहरण प्रहित।