Author- R Santhanam Deva Keralam (Chandra Kala Nadi) Vol -1 [English] Deva Keralam (Chandra Kala Nadi) Vol -2 [English] Deva Keralam (Chandra Kala Nadi) Vol -3 [English] The Deva Keralam...
Prashna Hora - Horary Astrology & Cosmic Psyche in Classical & Nadi [English] by Satyanarayana Naik Publisher: Sagar Publications This book deals with Horary Astrology in general and Naadi Prashna Hora...
Author- SBR Mishra जिस प्रकार उत्तर भारत में भृगु संहिता एवं रावण संहिता प्रचलन में है उसी प्रकार दक्षिण भारत में नाड़ी ग्रंथों का प्रचलन है l उत्तर भारत में भृगु...
एक समय ऐसा था जब ज्योतिष ज्ञान को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था लेकिन कालांतर में जब विदेशी शासकों का साम्राज्य रहा तो उन्होंने हिन्दू संस्कृति को क्षति पहुंचाई तथा धार्मिक...
REVELATION FROM NAADI JYOTISHA (BASED ON BRIGHU / NANDI NADI SYSTEM) Author- Satyanarayana Naik The present research work on the Naadi is unique in its presentation and it has many...
Author- Satyanarayana Naik This book deals with set pattern of karma for a particular individual which is again based on orbital providence. The effect of space significations and the dynamic...
Author- Raj Kumar Lt Col
विभिन्न वर्गों की तुलना में नवांश की अपेक्षाकृत महत्ता सभी लोगो ने स्वीकार की है I ज्योतिष इसे जन्मकुंण्डली के ठीक बाद या समकक्ष या उससे भी बेहतर मानते है I लगभग सभी ज्योतिष कोई भी पूर्वानुमान देने से पहले , विभिन्न भावो और ग्रहों की शक्ति जानने के लिए कुंण्डली और नवांश का अध्ययन साथ-साथ करते है I वैदिक ज्योतिष में नवांश की एक उत्कृष्ट स्थिति है और इसके बहुपक्षीय प्रयोग तथा निपुणता किसी भी विषय के सूक्ष्म परिक्षण और गहन अध्ययन के लिए बरबस ध्यान आकर्षित करती है I जेमिनी और नाड़ी पद्धति के अतिरिक्त ज्ञान और बुद्धिमतापूर्ण सिद्धांतो ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है I लेखक ने इन दोनों पद्धतियों का समावेश इस पुस्तक में करने का प्रयास किया है I जन्म कुंण्डली का अध्ययन भावो और ग्रहों के केवल स्थूल संकेत और गुण बताते है I जबकि नावश उनके विस्तृत और सूक्षतम् गुणों को बताते है I नवांश का आकार और विस्तार मूल रूप से एक चौथाई भाग के बराबर है I एक भाव / राशि लगभग ३० डिग्री का होता है जबकि नवांश उसका सूक्षतम् रूप (राशि का १/९ भाग या केवल ३" २०' ही) है जो इसे विलक्षण गुण देता है I
Author- KT Shubhakaran The title Bhaargava Naadika indicates that the book is based on the Naadi system of prediction prevalent in the Southern states of India. It is believed that...
Deva Keralam (Chandra Kala Nadi) (Volume 1) [Hindi] Author- Raj Kumar Lt Col
Deva Keralam (Chandra Kala Nadi) (Volume 2) [Hindi]
Deva Keralam (Chandra Kala Nadi) Vol-1 And 2
The contents of this book having its classical base will explore many secrets of Naadi. It is an integrated overview (not a system) having independent approaches explained for both Naadi...
Roots of Naadi Astrology- A Comprehensive Study ( English ) Author- Satyanarayana Naik Roots of Naadi Astrology is a practical study material on different Naadi systems selected from classical and...