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Katranein [Hindi]

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DESCRIPTION

Katranein [Hindi] By Manav Kaul

Publisher: Hind Yugm

मेरा नाम कतरनें हैं, मैं आपकी किताब हूँ। जी हाँ, मैं आपसे ही बात कर रही हूँ। आपने मुझे ही अपने हाथों में लिया हुआ है। आपको अजीब लग रहा होगा कि किताब आपसे कैसे बातें कर सकती है? पर मैं आपको बता दूँ कि हम किताबें यही करती हैं– बातें। जब आप हमें पढ़ रहे होते हैं तो वो सारी बातें ही हैं जिनके ज़रिए कहानी के संसार में आपका प्रवेश होता है। उस कहानी के एक सिरे पर आप होते हैं और उसका दूसरा सिरा किताब होती है। कहानी बीच में कहीं घट रही होती है। इस प्रक्रिया में यूँ, हम किताबें कभी अपनी सीमा नहीं लाँघती हैं, हम कहानी और आपके बीच में हमेशा अदृश्य-सी बनी रहती हैं। कभी-कभी किताबों के ज़रिए लेखक आपसे सीधे बात करता है, वो आपके और कहानी के बीच में लगा हुआ पर्दा हटा देता है, नई कहानियाँ कहने की कला में किताबें ऐसे प्रयोगों को बहुत उत्साह से अपनाती हैं। पर एक किताब लेखक की रज़ामंदी के बिना आपसे सीधे बात करे ये बहुत कम ही होता है। मैं, आपकी किताब भी कभी ये क़दम उठाने का नहीं सोचती, पर इस किताब की रूपरेखा ही लेखक ने कुछ ऐसी रखी है कि इसमें कुछ नया करने की आज़ादी की बहुत जगह है। ‘आज़ादी’ कितना सुंदर शब्द है न, मुझे बहुत पसंद है। शायद इसी शब्द की वजह से मैं लेखक की इजाज़त के बग़ैर आपसे बात कर पा रही हूँ।

—इसी पुस्तक से।

 

Katranein is a deeply moving and lyrical Hindi book by renowned writer Manav Kaul, published by Hind Yugm. The title, meaning “Scraps” or “Shreds,” reflects the fragmented yet meaningful pieces of thoughts, memories, and emotions that Kaul stitches together with poetic grace. Each page is a quiet meditation on love, time, nostalgia, and the many small things that shape a life.

Rather than presenting a linear narrative, Katranein offers glimpses—like torn pages from a diary—inviting readers into the writer’s inner world. Manav Kaul's signature reflective and sensitive writing makes this book a soothing experience for anyone who enjoys introspective Hindi literature. It is ideal for readers who find beauty in stillness, memory, and emotional honesty.

हिंदी विवरण
"कतरनें" मानव कौल द्वारा लिखी गई एक अत्यंत संवेदनशील और काव्यात्मक हिंदी पुस्तक है, जिसे हिंदी युग्म ने प्रकाशित किया है। इस किताब का शीर्षक ही अपने आप में प्रतीक है—विचारों, यादों और भावनाओं की वो छोटी-छोटी कतरनें जिन्हें लेखक ने बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है।

कतरनें कोई सीधी कहानी नहीं कहती, बल्कि यह लेखक की आत्मा की डायरी की तरह है—टुकड़ों में बँटी, लेकिन गहराई से जुड़ी हुई। मानव कौल की लेखनी यहाँ भी पाठकों को भीतर तक महसूस कराती है—प्रेम, समय, और खोए हुए पलों की शांति को। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो साहित्य में भावनात्मक सच्चाई और आत्मिक जुड़ाव को महत्व देते हैं।

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