Sarvatobhadra Chakra Phaladesh [Hindi] By SK Anil Publisher: Sagar Publications सर्वतोभद्र चक्र फलादेश [हिंदी]लेखक: एस. के. अनिलप्रकाशक: सागर पब्लिकेशन्स सर्वतोभद्र चक्र फलादेश एस. के. अनिल द्वारा लिखित एक अद्वितीय ज्योतिष...
व्यापार रत्न Author- Hardev Sharma प्राचीन सहिंताए एवं अर्धकांड -सम्बन्धी सभी उपलब्ध ग्रन्थ-रूपी रत्नाकर (समुद्र) का मंथन करके यह अन्वर्थ नाम 'व्यापार रत्न ' ग्रन्थ सरल सुबोध भाषा में लिखा...
Title: Vakri Grah Rahasya (वक्रि ग्रह रहस्य)Author: Lt. Col. Raj KumarLanguage: HindiCategory: Astrology Description:"Vakri Grah Rahasya" is a profound exploration of the mysterious effects of retrograde planets (Vakri Grah) in...
Author-MS Mehta ज्योतिष शास्त्र के गूढ़ सिद्धान्तों को सही ढंग से समझने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और इसके परिणाम स्वरुप सही फलकथन नहीं कर पाते है l...
Jyotish Mein Anglakshan Author: KN RaoPublisher: Vani Publications Description:Can the signs and marks on your body reveal your destiny? In Jyotish Mein Anglakshan, renowned astrologer KN Rao explores the astrological...
Jaimini Sutram - Sampuran (Hindi) by SC Mishra
जैमिनी सूत्रम - सुरेश चंद्र मिश्रा
जैमिनी के सभी उपलब्ध सूत्रों का हिन्दी भाष्य राशियों की विशेष दृष्टि का प्रकार कारकांश लग्न से सभी प्रकार का फलादेश पद लग्न व् आपकी आर्थिक दृष्टि उपपद लग्न व् आपका दाम्पत्य जीवन , जीविका, व्यवसाय व् रोग -निर्णय, आयु - निर्णय का विस्तृत व्आ प्रामाणिक मार्ग यशस्वी, ग्रन्थकार व् भाग्यशाली होना केमद्रुम योग का अनोखा विचार कारागार योग, सुख, स्वभाव, चरित्र व् स्त्री- रोग अपनी कुंण्डली से पुत्र की जन्म - कुंण्डली जानना अस्वाभाविक, दर्दनांक या स्वाभाविक मरण अनेक प्रसिद्ध व् अप्रिसद्ध दशा प्रकार व् फल जैमनीय मत में राजयोग एक नया ढंग मारक स्थान, मारक दशा व् मारक रोग आधान लग्न से ही संतान का लिंग -वर्ण स्त्री जातक के गुड़ आ विशेष नियम षड्वर्गो का फलादेश - एक विशेषता नवम आ सप्तम स्थान भी पुत्र स्थान, भाव लग्न, घटी लग्न, होरा लग्न आदि से फलादेश l
Pataki Risht Chakra [Hindi]Author: Shalini Dhasmana, KN RaoPublisher: Vani Publications Discover the profound wisdom of Vedic astrology with Pataki Risht Chakra, a detailed guide that unravels the intricate connections between...
Nakshatra Phal (Volume 1) - Nakshtron ke Aadhar Par Bhavishyavani aur Upayaलेखक: KT शुबकालनप्रकाशक: सागर पब्लिकेशन यह पुस्तक नक्षत्रों के आधार पर भविष्यवाणी और उनके उपायों को समझने में मदद...
Author- KT Shubhakaran नक्षत्रों पर आधारित भविष्यवाणी का उद्गम वैदिक काल में हुआ था, तब इसे " वेदांत ज्योतिष" कहते थे I नक्षत्र शब्द संस्कृत से उतपन्न हुआ है एक विचार के अनुसार इसका अर्थ (नक्ष = प्रवेश ) + ( त्र = रक्षा करने वाला ) है I अत: कुल मिलाकर प्रत्येक नक्षत्र २८ देवताओ में से प्रत्येक का घर अथवा निवास होता है, जो नक्षत्रीय तथा सौर विकास की रक्षा तथा संचालन करते है I नक्षत्रों पर आधारित भविष्यवाणी का मुख्य आधार जन्म - नक्षत्र अथार्त जन्म के समय एक विशेष नक्षत्र में चन्द्रमा की स्थिति है I प्रस्तुत पुस्तक के आगे अध्ययन से पूर्व निम्नलिखित जानकारी/ आंकड़े उपलब्ध होना आवश्यक है-१. जिस वर्षे में जातक का जन्म हुआ है उस वर्ष का ज्योतिष पंचांग I२. जन्म स्थान के अक्षांश तथा रेखांश का निर्धारण करना I३. जातक के जन्म का ठीक समय, दिन, मास तथा वर्ष का निर्धारण यदि जन्म समय किसी देश के निर्धारित समय के अनुसार है तो अक्षांश के आधार पर जन्म का स्थानीय समय भी जानना आवयश्क है I स्थानीय समय निकालने का सूत्र इस प्रकार है : यदि मेरिडियन के पूर्व में स्थित स्थान पर जन्म हुआ है तोअक्षांश की प्रत्येक डिग्री पर उस देश के निर्धारित समय में ४ मिनट जोड़े और यदि जन्मस्थान मेरिडियन के पश्चिम में स्थित है तो अक्षांश की प्रत्येक डिग्री पर निर्धारित समय...