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Mrityu Ke Baad Janam Se Pahle
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Mrityu Ke Baad Janam Se Pahle

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   मृत्यु के बाद जन्म से पहले

मौत पीड़ादायक नही, बल्कि कष्टनिवारक हितैषी है I प्रकृति बड़ी करुणावान 'सर्जन' है I 'अनिस्थिसिया' के समान हालत में प्रकृति देह से आत्मा को निकालने का आप्रेशन करती है I मौत के पहले शरीर में रोग की वजह से जो तकलीफे हो रही थी, वे सब खत्म हो जाती है I सारी भौतिक जरुरते समाप्त हो जाती है I देह के दुखदायी बंधन मिट जाते है I अगर किसी को पीड़ा होती है तो मौत के कारण नही, बल्कि जीवन को व्यर्थ गवाया, इसका पश्चाताप होता है I

सर्वप्रथम तो मृतात्मा अपने परिवारजनों के दुःख को कम करने की कोशिश करती है I उन्हे सात्वना देना चाहती है I भाषा का प्रयोग तो कर नहीं सकती, अतः परोक्ष ढंगो से बताना चाहती है कि मैं आनंद में हूं I किन्तु दुःख में लोग सिकुड़कर अग्रहणशील हो जाते है I पड़ोसी व् रिश्तेदार उन्हे और ज्यादा दुखी करने के प्रयास में रहते है I

  प्रियजनों का दुःख उसको रोकता है I एक अंधेरी सुरंग में से गुजरने का आकर्षण उसे दूसरी ओर खिंचता है I सुरंग के उस पार शीतल प्रकाश है, उसमे चुम्बक जैसा असर है I संत पलटू कहते है, उल्टा कुआ गगन में, जिसमे जले चिराग I 'उस डार्क टनल से यात्रा करके आत्मा इस लोक से उस लोक में पहुच जाती है I परलोक क़ी कोशिश, खिंचाव, गुरुत्वाकर्षण के समान बल होता है, जो सूक्ष्म शरीर पर कार्य करता है I          

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