रसरत्नाकर 'रस- रसायन खण्ड' By Swami Nath Mishr रसरत्नाकर ' ग्रन्थ श्री नित्यनाथ सिद्ध विरचित एक महान ग्रन्थ है जो समुद्र की भांति विशाल और गंभीर है l बारहवीं शताब्दी...
रसरत्नाकर 'रसेन्द्र खण्ड - मंत्र खण्ड ' By Swami Nath Mishr रसरत्नाकर ' ग्रन्थ श्री नित्यनाथ सिद्ध विरचित एक महान ग्रन्थ है जो समुद्र की भांति विशाल और गंभीर है ...
वास्तुशास्त्रविमर्श By Chandramohan Jha वास्तुशास्त्र एक विकसित शाखा है l इस शाखा की पूर्णता के लिए ज्योतिष की आवश्यकता होती है l इन दोनों शाखाओ में कही सामान्य अंतर है...
जातकालंकार By Satyendra Mishra
फलितज्योतिष का विकास पुराणों में उध्दत व्यास - वशिष्ठ - नारदादि दैवज्ञों के वचनो के आधार पर ही हुआ है I प्रस्तुत ग्रन्थ "जातकालंकार " श्रीमदभागतोक्त जो जातक सम्बन्धी फल है उन्ही के आधार पर निर्मित है l इस विषय में ग्रंथकार की भी स्पष्टोक्ति है I यह ग्रन्थ सात अध्यायों में है जिसमे छ: अध्याय ज्योतिष सम्बन्धि और सातवाँ वंश वर्णन का है I इन सातो अध्यायों में श्लोको की संख्या क्रमश : ११-३७-३३-३-२२-८ और ४ है I इन सब का योग ११८ होता है जबकि ग्रंथकार ने छठे अध्याय में ११० श्लोक ही बताया है I संभवत: ग्रन्थ में जो ज्योतिष सम्बन्धि श्लोक नहीं है, उनको ग्रंथकार ने गणना में नहीं लिया है I ग्रन्थ के अंतर्गत आने
आर्युर्वेदीय नाडीपरीक्षा- विज्ञान By Govind Prasad Upadhyya आर्युर्वेदीय चिकित्सा का उद्देश्य है - व्याधिविशेष का सम्प्राप्ति - विघटन तथा प्रकृति - स्थापन l यहाँ मात्र रोगनामपूर्वक नहीं अपितु प्रकृति -विकृतिपरक सम्प्राप्ति -ज्ञानपूर्वक रोग- निदान करने का विधान है l वैध रोगी- रोग परीक्षा द्वारा...
अभौतिक सत्ता में प्रवेश अभौतिक सत्ता में केवल भाव है, भावना है, अनुभूतियाँ है - जिनको प्रमाणित नहीं किया जा सकता I उसी प्रकार जैसे आप सपने में घटी घटनाओ...
योगवाली भृगुसंहिता पर आधारित फलित ज्योतिष का प्रामाणिक ग्रन्थ आचार्य वररुचि द्वारा प्रणीत प्रस्तुत ग्रन्थ 'योगावली' भृगुसंहिता के योग प्रकरण पर आधारित योगों का विशाल संग्रह है l यह ग्रन्थ...
अतिप्राचीन मान्यतानुसार भगवान शिव द्वारा उपदिष्ट एवं कालान्तर में गोरक्षनाथ द्वारा प्रवर्तित शाबरमन्त्र भाषा एवं व्याकरण की दृष्टि से सर्वथा अशुद्ध होते हुये भी आर्यावर्त के ग्राम्यांचलों...