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Aatam Sammohan Safalta Ki Kunji
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Aatam Sammohan Safalta Ki Kunji

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ABOUT THIS BOOK

आत्म सम्मोहन सफलता की कुंजी

क्या आप- अपने जीवन में सफलता ही नहीं, सुफलता भी चाहते है ? तो यह किताब आपके बड़े काम की है I

मनोवैज्ञानिको ने मन को दो बड़े भागो में विभक्त किया है I मस्तिक का वह भाग, जिसमे होने वाली क्रियाओ की जानकारी हमे होती है, चेतन मन है I यह वस्तुनिष्ठ एवम तर्क पर आधारित होता है I सामान्यत: हमे जिसकी जानकारी नहीं होती, जाग्रत मस्तिष्क के परे मस्तिष्क का वह हिस्सा अवचेतन मन कहलाता है I इसका धुंधला सा अनुभव यदाकदा ही होता है I सपनो में यही अंग कार्य करता है I

उदाहरण के रूप में समझे तो मन की स्थिति पानी में तैरते हिमखंड की तरह है जिसका मात्र १० प्रतिशत भाग पानी की सतह से ऊपर दिखाई देता है और शेष ९० प्रतिशत भाग सतह से निचे रहता है I चेतन खंड सम्पूर्ण मस्तिष्क का दस - बारह प्रतिशत  ही होता है I इससे नो गुना बड़ा खंड मस्तिष्क का अवचेतन अंग है I स्मरण रखे कि वस्तुत: मस्तिष्क का विभाजन जैसा कुछ नहीं होता जैसा कि उदाहरण दिया गया है I ऐसा केवल समझाने के लिए बताया है I आज जो चेतन मन है वह कल अवचेतन हो जाता है I अवचेतन मन को प्रयत्नपूर्वक चेतन मन में परिवर्तित किया जा सकता है I सारे निर्णय चेतन मन ही करता है I अवचेतन मन सारी तैयारी, प्रबन्ध या व्यवस्था करता है I चेतन मस्तिष्क यह तय करता है कि 'क्या' करना है, और अवचेतन मस्तिष्क यह तय करता है कि उसे 'कैसे' मूर्तरूप दिया जाय I हमारे सारे अनुभव, सुनी- पढ़ी जानकारी, दमित इच्छाये एवं दमित विचार हमारे अवचेतन में संचित है I परन्तु जब - कभी हम उनका उपयोग करना चाहते है, वे चेतन का हिस्सा बन जाते है I ये हमारे व्यक्तित्व को बनाते व् प्रभावित करते है और हमारे व्यवहार एवं आचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है I 

ओशोधारा के 'सम्मोहन प्रज्ञा' नामक त्रिदिविसय कार्यक्रम में सफलता के सोपानों पर चढ़ने की विधि सिखाई जाती है I सेल्फ - सजेशन द्वारा आत्म- सम्मोहन करके जिंदगी में मनचाहा परिवर्तन किया जा सकता है I प्रस्तुत पुस्तक उसी दिशा में व्यावहारिक रूप से मार्ग प्रशस्त करती है I

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