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Fal-Fool, Sabjion, Jadi- Butiyon Masalon Dwara Elaj
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Fal-Fool, Sabjion, Jadi- Butiyon Masalon Dwara Elaj

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फल-फूल, सब्जियां व मसाले हर समय हमारे आसपास उपलब्ध होने वाली वस्तुएं हैं। इनके दैनिक उपयोग के बोरे में थ्रोडी-बहुत जानकारी सभी को होती है ।किंतु यही विना पैसे की वस्तुएं औषधियों के रूप में हमारे अनेक रोगों को समूल नष्ट करने में सक्षम हैं, ऐसा गूढ ज्ञान सभी को नहीं होता ।कुछ तो हम लोग इस और ध्यान  नहीं देते, कुछ हमारी आदत अग्रेजी औषधियों की पड़ गई है। अग्रेजी औषधियों से शरीर पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव भी हो सकते हैं, जबकि औषधीय गुणों से परिपूर्ण फल', सब्जी व मसालों की निर्धारित मात्रा

लेने से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पाता । सामान्य किस्म के घरेलू उपचार में तोये  वस्तुएं रामबाण का काम करती हैं ।पेट के दर्द में हींग का लेप व खाने के सोडे की फंकी सभी को फायदा पहुचाती है। परन्तु यहीं खाने का सोडा ईनो (ENO) के नाम से बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ बना-बनाकर बेच रही हैं और हम उसे चौगुने दानों पर खरीद रहे हैं ।

गुलाब से जहां गुलकन्द व गुलाब जल बनता है, वहीं नीम रक्तशोघक के रूप में सर्वसुलभ है । शहद को प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में 80 रोगों का नाशक बताया गया है। गाजर व पपीता में विटामिन 'ए' होता है तो अमरूद-अग्रेवले में विटामिन 'सो' ।गेंदा चोट-मोच में कारगर रहता है जबकि अंजीर कज्जनाशक होता है । लौंग  का उपयोग पचासों प्रकार के रोगों में होता है। पालक खून की कमी को दूर करता है तो मेथी मधुमेह से मुक्त कराती है । इस प्रकार फल-फूल, सब्जियों व मसालों से विभिन्न प्रकार के रोगों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है । इन्ही से आयुर्वेद के नुस्खों का गठन हुआ है ।आयुर्वेद के इसी जनोपयोगी व रोगनाशक नुस्खों  के भंडार से हमने कुछ मोतीचुनकर प्रस्तुत पुस्तक रूपी गुलदस्ते द्वारा जाप तक पहुचाने का प्रयास किया है।

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